आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

आज का शब्द: पारिजात और रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ की कविता- आओ लिखें दीप

आज का शब्द
                
                                                         
                            'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- पारिजात, जिसका अर्थ है- समुद्र मंथन के समय निकला हुआ एक देववृक्ष जो स्वर्गलोक में इंद्र के नंदनकानन में है, हरसिंगार। प्रस्तुत है रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ की कविता- आओ लिखें दीप
                                                                 
                            

साथ सारे छोड़ देंगे मोड़ पर
एक तुम हो साथ यह विश्वास है।
हम अँधेरों से लड़ें, आगे बढ़ें
होगा उजेरा आज भी आस है।

आओ लिखें दीप नभ के भाल पर
अधर हँसे कि झरें पारिजात भी।
सुरभि में नहाकर हो पुलकित धरा
ओस भीगे सभी पुलकित पात भी।
 
बुहारता उदासियों की धूल को
थिरकता गली -गली में उजास है।
हम अँधेरों से लड़ें, आगे बढ़ें
होगा उजेरा आज भी आस है ।

हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें।

एक महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर