'निश्छल' का अर्थ होता है- छल- कपट से रहित, सरल प्रकृति का या सीधा। अमर उजाला 'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखा में आज का शब्द है- निश्छल। प्रस्तुत है जयशंकर प्रसाद की कविता: ले चल वहाँ भुलावा देकर
ले चल वहाँ भुलावा देकर, मेरे नाविक! धीरे-धीरे।
जिस निर्जन में सागर लहरी, अंबर के कानों में गहरी—
निश्छल प्रेम-कथा कहती हो, तज कोलाहल की अवनी रे !
जहाँ साँझ-सी जीवन-छाया ढीले अपनी कोमल काया,
नील नयन से ढुलकाती हो, ताराओं की पाँति घनी रे !
जिस गंभीर मधुर छाया में—विश्व चित्र-पट चल माया में—
विभुता विभु-सी पड़े दिखाई दुख-सुख वाली, सत्य बनी रे!
श्रम-विश्राम क्षितिज बेला से—जहाँ सृजन करते मेला से,
अमर जागरण उषा नयन से—बिखराती हो ज्योति घनी रे
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