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आज का शब्द: ललक और रामधारी सिंह 'दिनकर' की कविता- चले ममता का बंधन तोड़

हिंदी हैं हम
                
                                                         
                            ललक का अर्थ है- गहरी लालसा या तीव्र इच्छा। अमर उजाला 'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- ललक। प्रस्तुत है रामधारी सिंह 'दिनकर' की कविता- चले ममता का बंधन तोड़
                                                                 
                            

सिमट विश्व-वेदना निखिल बज उठी करुण अन्तर में,
देव ! हुंकरित हुआ कठिन युगधर्म तुम्हारे स्वर में ।
काँटों पर कलियों, गैरिक पर किया मुकुट का त्याग
किस सुलग्न में जगा प्रभो ! यौवन का तीव्र विराग ?
चले ममता का बंधन तोड़
विश्व की महामुक्ति की ओर ।

तप की आग, त्याग की ज्वाला से प्रबोध-संधान किया ,
विष पी स्वयं, अमृत जीवन का तृषित विश्व को दान किया ।
वैशाली की धूल चरण चूमने #ललक ललचाती है ,
स्मृति-पूजन में तप-कानन की लता पुष्प बरसाती है ।

वट के नीचे खड़ी खोजती लिए सुजाता खीर तुम्हें ,
बोधिवृक्ष-तल बुला रहे कलरव में कोकिल-कीर तुम्हें ।
शस्त्र-भार से विकल खोजती रह-रह धरा अधीर तुम्हें ,
प्रभो ! पुकार रही व्याकुल मानवता की जंजीर तुम्हें । आगे पढ़ें

4 वर्ष पहले

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