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आज का शब्द: किंशुक और सर्वेश्वरदयाल सक्सेना की कविता 'आए महंत वसंत'

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हिंदी हैं हम शब्द-शृंखला में आज का शब्द है - किंशुक जिसका अर्थ है पलाश का पौधा। कवि सर्वेश्वरदयाल सक्सेना ने अपनी कविता में इस शब्द का प्रयोग किया है। 

मखमल के झूल पड़े हाथी-सा टीला
बैठे किंशुक छत्र लगा बांध पाग पीला
चंवर सदृश डोल रहे सरसों के सर अनंत
आए महंत वसंत

श्रद्धानत तरुओं की अंजलि से झरे पात
कोंपल के मुंदे नयन थर-थर-थर पुलक गात
अगरु धूम लिए घूम रहे सुमन दिग-दिगंत
आए महंत वसंत

खड़-खड़ खड़ताल बजा नाच रही बिसुध हवा
डाल-डाल अलि पिक के गायन का बंधा समा
तरु-तरु की ध्वजा उठी जय जय का है न अंत
आए महंत वसंत
एक वर्ष पहले

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