'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- कर्म, जिसका अर्थ है- वह जो किया जाए, क्रिया, कार्य, व्याकरण में वह शब्द जिस पर कर्ता की क्रिया का प्रभाव पड़े। प्रस्तुत है रंजना वर्मा की रचना- संसार माया मोह का
रहिये हमेशा कर्मरत यह कर्म ही तो धर्म है
संवाद होते हैं मधुर प्रतिकूल लेकिन कर्म है
संसार माया मोह का पहने कवच ऐसा खड़ा
है वेधना सम्भव नहीं कितना कठिन यह वर्म है
परवाह करता कौन है कोई दुखी हो या मरे
समझा कोई सकता नहीं दुनियाँ बड़ी बेशर्म है
तूफान हिंसा के उठे, दहशत दिशाओं में भरी
सुख शांति की क्या बात हो चलती हवा भी गर्म है
है योग्यता इनमें नहीं शिक्षा ग्रहण कोई करें
हर दण्ड पच जाता इन्हें मोटा बहुत ही चर्म है
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