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आज का शब्द: जोगी और रामस्वरूप 'सिन्दूर' की कविता- मैंने दृग-जल स्नान किया है

आज का शब्द
                
                                                         
                            'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- जोगी, जिसका अर्थ है- एक प्रकार के भिक्षुक जो सारंगी लेकर भर्तृहरि के गीत गाते और भीख माँगते हैं, वह जो योग करता हो, योगी। प्रस्तुत है रामस्वरूप 'सिन्दूर' की कविता- मैंने दृग- जल स्नान किया है 
                                                                 
                            

भोगी तन में, जोगी मन में!
यह था तो दुर्योग,
हो गया पर सुयोग जीवन में!

कंठ, कोहिनूरों की माला,
करतल, कस्तूरी मृगछाला,
सौ-सौ यत्न करूँ, पर जो हूँ
वह न दिखूँ दर्पण में!

मैंने दृग-जल स्नान किया है,
प्रति पल कोई पर्व जिया है,
घर-आँगन-जैसा ही रह लूँ
मैं अनन्त निर्जन में! आगे पढ़ें

3 वर्ष पहले

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