'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- जोगी, जिसका अर्थ है- एक प्रकार के भिक्षुक जो सारंगी लेकर भर्तृहरि के गीत गाते और भीख माँगते हैं, वह जो योग करता हो, योगी। प्रस्तुत है रामस्वरूप 'सिन्दूर' की कविता- मैंने दृग- जल स्नान किया है
भोगी तन में, जोगी मन में!
यह था तो दुर्योग,
हो गया पर सुयोग जीवन में!
कंठ, कोहिनूरों की माला,
करतल, कस्तूरी मृगछाला,
सौ-सौ यत्न करूँ, पर जो हूँ
वह न दिखूँ दर्पण में!
मैंने दृग-जल स्नान किया है,
प्रति पल कोई पर्व जिया है,
घर-आँगन-जैसा ही रह लूँ
मैं अनन्त निर्जन में!
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