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आज का शब्द: झाँकना और केदारनाथ सिंह की कविता- मेरे बेटे बिजली की तरह कभी मत गिरना

आज का शब्द
                
                                                         
                            'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- झाँकना, जिसका अर्थ है- आड़ से, खिड़की आदि से बाहर की वस्तु को चुपके से देखना। प्रस्तुत है केदारनाथ सिंह की कविता-  मेरे बेटे बिजली की तरह कभी मत गिरना
                                                                 
                            

मेरे बेटे
कुँए में कभी मत झाँकना
जाना
पर उस ओर कभी मत जाना
जिधर उड़े जा रहे हों
काले-काले कौए

हरा पत्ता
कभी मत तोड़ना
और अगर तोड़ना तो ऐसे
कि पेड़ को ज़रा भी
न हो पीड़ा
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4 वर्ष पहले

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