आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

आज का शब्द: दिव और महादेवी वर्मा की कविता 'कोई यह आँसू...'

aaj ka shabd div mahadevi verma famuos hindi kavita koi yah ansoo
                
                                                         
                            

हिंदी हैं हम शब्द-शृंखला में आज का शब्द है दिव जिसका अर्थ है - 1. स्वर्ग 2. आकाश 3. दिन। कवयित्री महादेवी वर्मा ने अपनी कविता में इस शब्द का प्रयोग किया है। 

कोई यह आँसू आज माँग ले जाता!

तापों से खारे जो विषाद से श्यामल,
अपनी चितवन में छान इन्हें कर मधु-जल,
फिर इनसे रचकर एक घटा करुणा की
कोई यह जलता व्योम आज छा आता!

वर क्षार-शेष की माँग रही जो ज्वाला,
जिसको छूकर हर स्वप्न बन चला छाला,
निज स्नेह-सिक्त जीवन-बाती से कोई,
दीपक कर इसको उर-उर में पहुँचाता!

तम-कारा-बंदी सांध्य रंगों-सी चितवन;
पाषाण चुराए हैं लहरों से स्पंदन,
ये निर्मम बंधन खोल तड़ित से कर से,
चिर रंग रूपों से फिर यह शून्य बसाता!

सिकता से तुलसी साध क्षार से उर-धन,
पारस-साँसें बेमोल ले चला हर क्षण,
प्राणों के विनिमय से इनको ले कोई, 
दिव का किरीट भू का शृंगार बनाता! 
 

हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें।  
                                                                 
                            

                                                                                            
7 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर