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आज का शब्द: दिगंबर और बुद्धिनाथ मिश्र की कविता- सड़क किनारे छत्रक जैसा

आज का शब्द
                
                                                         
                            'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- दिगंबर, जिसका अर्थ है- शिव, महादेव, एक प्रकार के जैन साधु जो सदा नंगे रहते हैं, नंगा रहने वाला जैन यती। प्रस्तुत है बुद्धिनाथ मिश्र की कविता- सड़क किनारे छत्रक जैसा
                                                                 
                            

सड़क किनारे, बित्ते भर का
टूटा-फूटा खड़ा शिवाला
उसमें कैसे करें गुज़ारा
देवों के, असुरों के बाबा !

मुकुट नहीं है, बाबा के सिर
काँटेदार धतूरे के फल
या रग्घू के गले बताशे
या फिर राघव के नीलोत्पल ।

सड़क किनारे छत्रक जैसा
बेढंगा-सा उगा शिवाला
जहाँ पालते पशु आवारा
मनुजों के, दनुजों के बाबा !

पेट्रो के इस युग में उनके
गंगाजल की माँग नहीं है
इसीलिए बाबा के घर में
देखो भूजी भाँग नहीं है ।

सड़क किनारे नित असँख्य
सन्तानों के संग
सोता है बूढ़ा बेचारा
जीवों-मरजीवों के बाबा !

पाट-पटोरा, सोना-चाँदी
जो भरते हैं औरों के घर
वे देवों के देव स्वयं
रहते मसान में, बने दिगम्बर ।

सड़क किनारे, बड़े जतन से
विश्वासों पर टिका शिवाला
जहाँ आज डाले हैं डेरा
नंगो के, चंगों के बाबा !

2 वर्ष पहले

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