'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- दिगंबर, जिसका अर्थ है- शिव, महादेव, एक प्रकार के जैन साधु जो सदा नंगे रहते हैं, नंगा रहने वाला जैन यती। प्रस्तुत है बुद्धिनाथ मिश्र की कविता- सड़क किनारे छत्रक जैसा
सड़क किनारे, बित्ते भर का
टूटा-फूटा खड़ा शिवाला
उसमें कैसे करें गुज़ारा
देवों के, असुरों के बाबा !
मुकुट नहीं है, बाबा के सिर
काँटेदार धतूरे के फल
या रग्घू के गले बताशे
या फिर राघव के नीलोत्पल ।
सड़क किनारे छत्रक जैसा
बेढंगा-सा उगा शिवाला
जहाँ पालते पशु आवारा
मनुजों के, दनुजों के बाबा !
पेट्रो के इस युग में उनके
गंगाजल की माँग नहीं है
इसीलिए बाबा के घर में
देखो भूजी भाँग नहीं है ।
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