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आज का शब्द: अन्वेषण और महादेवी वर्मा की कविता 'अब वरदान कैसा!'

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हिंदी हैं हम शब्द-शृंखला में आज का शब्द है अन्वेषण जिसका अर्थ है 1. खोज; अनुसंधान 2. शोध। कवयित्री महादेवी वर्मा ने अपनी कविता में इस शब्द का प्रयोग किया है। 

देव अब वरदान कैसा!

वेध दो मेरा हृदय माला बनूँ प्रतिकूल क्या है!
मैं तुम्हें पहचान लूँ इस कूल तो उस कूल क्या है!
छीन सब मीठे क्षणों को,
इन अथक अन्वेषणों को
आज लघुता ले मुझे
दोगे निठुर प्रतिदान कैसा!

जन्म से यह साथ हैं मैंने इन्हीं का प्यार जाना;
स्वजन ही समझा दृगों के अश्रु को पानी न माना;
इंद्रधनु से नित सजी-सी,
विद्युत-हीरक से जड़ी-सी,
मैं भरी बदली रहूँ
चिर मुक्ति का सन्मान कैसा!

युग-युगांतर की पथिक मैं छू कभी लूँ छाँह तेरी
ले फिरूँ सुधि दीप-सी, फिर राह में अपनी अँधेरी;
लौटता लघु पल न देखा
नित नए क्षण-रूप रेखा
चिर बटोही मैं, मुझे
चिर पंगुता का दान कैसा! 
एक वर्ष पहले

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