आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

आज का शब्द: अक्षर और उमाकांत मालवीय की कविता- नाकाफ़ी लगती है हर ज़बान

आज का शब्द
                
                                                         
                            'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- अक्षर, जिसका अर्थ है- अच्युत, स्थिर, वर्णमाला का कोई स्वर या व्यंजन वर्ण। प्रस्तुत है उमाकंत मालवीय की कविता- नाकाफ़ी लगती है हर ज़बान 
                                                                 
                            

नाकाफ़ी लगती है हर ज़बान 
कोई अक्षर 
कोई शब्द किसी भाषा का 
पूरा-पूरा कैसे व्यक्त करे 
क्या कुछ कहता मन का बियाबान? 

एक रहा आने की, जाने की 
घिसे-पिटे पंगु कुछ मुहावरे 
दीमक की चाटी कुछ शक्लें हैं 
बदहवास कुछ, कुछ-कुछ बावरे। 
कोई कितना ज़हर पिए कहो 
नीला पड़ गया टँगा आसमान। 

बाबा आदम से गुम हुए सभी 
तोड़ते ज़मीन कुछ तलाशते। 
रूढ़ हो गईं सारी मुद्राएँ 
अर्थ जरा-जर्जर-से खाँसते। 
कितना यांत्रिक! आदत-सा लगता 
डूब रहा सूरज या हो विहान।  आगे पढ़ें

3 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर