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कबीर के 5 चुनिंदा दोहे जिनमें छुपा जीवन का मर्म

साहित्य
                
                                                         
                            मन के मते न चलिये, मन के मते अनेक 
                                                                 
                            
जो मन पर असवार है, सो साधु कोई एक ।।

भावार्थ:-
मन के मत में न चलो, क्योंकि मन के अनेको मत हैं। जो मन को सदैव अपने अधीन रखता है, वह साधु कोई विरला ही होता है। 

एक शब्द सुख खानि है, एक शब्द दुःखराखि है 
एक शब्द बन्धन कटे, एक शब्द गल फंसि ।।

भावार्थ:-
समता के शब्द सुख की खान हैं, और विषमता के शब्द दुखों की ढेरी हैं। निर्णय के शब्दों से विषय - बन्धन कटते हैं, और मोह - माया के शब्द गले की फांस हो जाते हैं।
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5 घंटे पहले

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