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शकील बदायूंनी: ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया

शकील बदायूंनी: ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया
                
                                                         
                            'उन्हें अपने दिल की ख़बरें मिरे दिल से मिल रही हैं
                                                                 
                            
मैं जो उन से रूठ जाऊँ तो पयाम तक न पहुँचे'

अपने ख़ूबसूरत फ़िल्मी गीतों और दिलकश ग़ज़लों से आम लोगों के दिलों पर छा जाने वाले शायर शकील बदायूंनी का जन्म 3 अगस्त 1916 को बदायूं में हुआ था। शकील बदायूंनी शायरी की ज़मीं से फ़िल्मों की दुनिया में आये थे। आज तक कुछ गिने चुने साहित्यकार ही शोहरत के इस मक़ाम पर पहुंच सके हैं। उनकी जादुई क़लम ने हिंदी सिनेमा जगत को कई शानदार और सदाबहार गीत दिए जो आज भी लोगो की ज़ुबां पर क़ायम हैं।

'ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया
जाने क्यों आज तेरे नाम पे रोना आया'
 

शकील बदायूंनी बचपन से ही शायरी का शौक़ रखते थे और महज़ चौदह वर्ष की उम्र से ही उन्होंने शेर कहना शुरू कर दिया। उन्होंने उर्दू फ़ारसी की शिक्षा बदायूं में ही पूरी की। उसके बाद वह अलीगढ़ से बी.ए. पास करने के बाद वर्ष 1942 मे दिल्ली पहुंचे जहाँ उन्होंने कुछ वक़्त सरकारी नौकरी की। शकील बदायूंनी दिल से शायर थे और उन्होंने मुशायरों में हिस्सा लेने का सिलसिला शुरू किया। जल्दी ही वो उस वक्त के मुशायरों की रौनक और जान बन गये उनका जगमगाता व्यक्तित्व श्रोताओं को बेहद आकर्षित करता था। 1944 में शकील एक मुशायरे के लिए मुंबई आये और उस समय उनकी मुलाक़ात ए.आर.कारदार और नौशाद से हुई। शकील बदायूंनी ने नौशाद के कहने पर गीत की एक लाइन सुनाई जिसके बाद नौशाद उनके मुरीद हो गये।

'हम दर्द का अफ़साना दुनिया को सुना देंगे,
हर दिल में मोहब्बत की आग लगा देंगे'
 
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4 वर्ष पहले

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