1- लीडर जब आँसू बहा कर लोगों से कहते हैं कि मज़हब ख़तरे में है तो इसमें कोई हक़ीक़त नहीं होती। मज़हब ऐसी चीज़ ही नहीं कि ख़तरे में पड़ सके, अगर किसी बात का ख़तरा है तो वो लीडरों का है जो अपना उल्लू सीधा करने के लिए मज़हब को ख़तरे में डालते हैं।
2- दिल ऐसी शैय नहीं जो बाँटी जा सके।
3- भूक किसी क़िस्म की भी हो, बहुत ख़तरनाक है।
4- जिस तरह जिस्मानी सेहत बरक़रार रखने के लिए कसरत की ज़रूरत है, ठीक उसी तरह ज़हन की सेहत बरक़रार रखने के लिए ज़हनी वरज़िश की ज़रूरत है।
5- जो बात महीनों में ख़ुश्क तक़रीरों से नहीं समझाई जा सकती, चुटकियों में एक फ़िल्म के ज़रीए से ज़हन-नशीन कराई जा सकती है।
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2 वर्ष पहले
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