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भगवान राम के अयोध्या आगमन पर चुनिंदा चौपाइयां, भाग-2

साहित्य
                
                                                         
                            जे जैसेहिं तैसेहिं उठि धावहिं। बाल बृद्ध कहँ संग न लावहिं॥
                                                                 
                            
एक एकन्ह कहँ बूझहिं भाई। तुम्ह देखे दयाल रघुराई॥

भावार्थ:-
जो जैसे हैं (जहाँ जिस दशा में हैं) वे वैसे ही (वहीं से उसी दशा में) उठ दौड़ते हैं। (देर हो जाने के डर से) बालकों और बूढ़ों को कोई साथ नहीं लाते। एक-दूसरे से पूछते हैं - भाई! तुमने दयालु रघुनाथ को देखा है?
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2 वर्ष पहले

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