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जूलियस फ्यूचिक की कहानी 'सहायता'

Julius Fuchik's story 'Help'
                
                                                         
                            आज रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध ने तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। युद्ध हमेशा से विध्वंशक रहा है और सबसे ज्यादा प्रभावित आम जनता ही होती रही  है। चेक कथाकार-नाटककार जूलियस फ्यूचिक की कहानी 'सहायता' ऐसी ही कहानी है जो युद्ध के साये में लिखी गई है।  
                                                                 
                            

ऊपर से देखने पर वह छोटा-सा दायरा लगता था। वहाँ बच्चे रंग-बिरंगे बंटों के साथ खेल रहे थे। जंग कविता का मुँह तो बन्द कर सकती नहीं है, बच्चों के खेलों को नहीं। एक हवाई जहाज ने निशाना बाँधा। बम बच्चों के ऐन बीच में आकर गिरा।
लोग अपने घरों से भागे हुए आये और बच्चों की चीथड़े बनी लाशों के गिर्द जमा हो गये। आखिर उन्होंने लाशों को उठाया और स्कूल की इमारत में ले जाकर रखा, जहाँ से कुछ देर पहले वे हँसते-कूदते हुए आये थे।
सरकारी फोटोग्राफर आया और उसने बड़े बेढंगे तरीके से उस हौलनाक दस्तावेजों को अपने कैमरे में बन्द कर लिया। दहशत के कारण उसका  गायब हो चुका था।
तीन दिन के अन्दर यह दस्तावेज पेरिस, लन्दन और प्राग पहुँच गया। समाचार-पत्रों ने उसे अपने पहले पृष्ठों पर छापा।
बहार की ऋतु थी वह। कोयले के डिपो के पीछे एक अकेला खड़ा पेड़ फूलों से भरा हुआ था, जो उस इलाके के धुएँ के समुद्र में प्रकाश स्तम्भ-सा प्रतीत होता था। और सामने एक स्थान की ओर मानो संकेत करता हुआ बच्चों को खेलने की दावत दे रहा था।
जिस दिन की बात मैं कर रहा हूँ, उस दिन छह लड़के वहाँ खेलने के लिए आये थे। वे बैठ गये और उन्होंने एक-दूसरे के साथ सिर जोड़ लिये।
फ्रान्ता ने अपनी स्कूल की कापी खोली और उसमें से समाचार-पत्र का एक पृष्ठ निकाला, उस पृष्ठ पर एक बच्चे का चेहरा उनकी ओर झाँक रहा था जिसका सिर बम से नष्ट हो चुका था।
एल मुइत का लड़का फ्रान्ता दृढ़ता भरे लहजे में पढ़ने लगा। तब उसकी आवाज बच्चों जैसी नहीं थी।
उसने वह समाचार पड़ा, जिसमें एल मुइत पर हुई बमबारी का वर्णन था, फासिस्टों की बर्बरता का वर्णन था, और उस वर्बरता के विरुद्ध जनता के रोष का वर्णन था।
उन लड़कों को लगा कि एल मुइत के वे बच्चे वे स्वयं थे, उन्हीं की तरह वे स्कूल से निकलकर बंटों से खेलने गये थे और मौत अचानक उन पर झपट पड़ी थी।
उन्होंने फटी हुई आँखों से ऊपर देखा। आकाश में बादल दौड़े जा रहे थे। वहाँ कोई दुश्मन नहीं था। लेकिन जब उन्होंने ध्यान से देखा तो अचानक दुश्मन के कई भयानक चेहरे दिखाई दिए। और फिर, उन्हें लगा, जैसे एल मुइत के वे बच्चे उस दुश्मन के खिलाफ उनसे सहायता माँग रहे थे। आगे पढ़ें

4 वर्ष पहले

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