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Dushyant Kumar Shayari: दुष्यंत कुमार की ग़ज़लों से चुनिंदा शेर

dushyant kumar selected shayari collection
                
                                                         
                            

आगे निकल गए हैं घिसटते हुए क़दम
राहों में रह गए हैं निशाँ और भी ख़राब 


माथे पे रख के हाथ बहुत सोचते हो तुम
गंगा क़सम बताओ हमें क्या है माजरा 

उन का कहीं जहाँ में ठिकाना नहीं रहा
हम को तो मिल गया है अदब में मक़ाम और 


जाने किस किस का ख़याल आया है
इस समुंदर में उबाल आया है 

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3 वर्ष पहले

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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