हाल ही में अमर उजाला काव्य की ओर से मतदान पर कविताएं भेजने का आग्रह किया गया था। जिसमें डॉ.अनिल शर्मा 'अनिल' की कविता को चुना गया। बिजनौर के अनिल हिंदी साहित्य से स्नातक हैं और कविता, गीत ,गीतिका, कहानी, आलेख, लघुकथा, व्यंग्य, परिचर्चा,समीक्षा, साक्षात्कार और अन्य विधाओं में भी लिखते हैं। मुझको जग में आने दो, जिंदगी गीत हो जाएगी,धामदेव की नगरी धामपुर, शिक्षा जगत की लघुकथाएं, प्रकृति का ऐसे न शोषण करो, प्राकृतिक रंग उर्जा चिकित्सा इनकी कृतियां हैं। अनुभूतियां,अभिव्यक्ति,अन्तर्मन, अनुगूंज, अभिप्राय,अर्पण,और अनुसंधान काव्य का संपादन कर चुके हैं।
मतदान पर लिखी इनकी कविता है
मित्रवर अवश्य मतदान कीजिए।
लोकतंत्र का महान पर्व है चुनाव,
चर्चाएं गली-गली नगर व गांव,
कुंतल की बात कर देते एक पाव,
सभी लोग दे रहे अपने सुझाव,
नेता गण चल रहे राजनीतिक दांव,
इनकी बातों पर आप ध्यान दीजिए।
मित्रवर अवश्य मतदान कीजिए।।
मतदान देता नेता का कद नाप,
मतदान छोड़ता है अमिट छाप,
पहले मतदान फिर कर लेना जाप,
मतदान पर कीजिएगा वार्तालाप,
सबको बताइएगा मान दीजिए।
मित्रवर अवश्य मतदान कीजिए।।
आपके ही मत से चुनी जाती है सरकार
आपके मत हित सब रहते हैं बेकरार,
आपके ही मत हित हो रहा प्रचार,
आपका ही मत लोकतंत्र का श्रंगार,
आपका ही मत आपका अधिकार,
अपना मत नहीं करना बेकार,
मत की शक्ति का सम्मान कीजिए।
मित्रवर अवश्य मतदान कीजिए।।
सही बात अपनी मनवाने के लिए,
सरकार मनचाही बनवाने के लिए,
प्रगति वाला पथ अपनाने के लिए,
खुशहाल भविष्य सजाने के लिए,
देश को सफल बनाने के लिए,
लोकतंत्र सशक्त बनाने के लिए,
लोकतंत्र का यह अनुष्ठान कीजिए।
मित्रवर अवश्य मतदान कीजिए।।
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