शहीदे आजम भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 को पंजाब के लायलपुर के बंगा गांव में हुआ था। 23 मार्च 1931 को उन्हें फांसी पर लटकाया गया। भगत सिंह के अंदर एक शायर भी छिपा था। लिहाजा हम काव्य के मुड़ मुड़ के देखता हूं सेक्शन में उनके जीवन के कुछ संस्मरणों को याद करेंगे।
चाची के आंखों से निकले आंसू देखकर...
भगत सिंह जब महज 3-4 साल के थे तब से वह अपनी चाची के एकांत जीवन को देखते थे। लिहाजा उन्हें देशभक्ति का पाठ बचपन से ही परिवार में मिलने लगा था। उनके चाचा सरदार अजीत सिंह ब्राजील मेें निर्वासित जीवन बिता रहे थे। चाची के आंखों से निकले आंसू देखकर भगत सिंह कहते थे 'चाची तुम निराश मत हो, मैं अंग्रेजों को इस देश से भगा दूंगा। और चाचा यहां आ जाएंगे।'
तब उनकी उम्र महज 4 साल की थी...
एक बार भगत सिंह अपने पिता सरदार किशन सिंह के साथ खेत पर गए थे। तब उनकी उम्र महज 4 साल की थी। इसी बीच उनके पिता ने देखा कि भगत सिंह खेत में बैठकर वहां की मिट्टी और कंकण को हाथ से छू रहे थे। पिता ने पूछा, 'भगत क्या कर रहे हो' तो उन्होंने जवाब दिया, 'बंदूकें बो रहा हूं, अंग्रेजों को देश से भगाना है।'
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चाची के आंखों से निकले आंसू देखकर...
7 वर्ष पहले
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