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मंच सूना हो गया, पर उनके गीत हमेशा जिंदा रहेंगे

गोपाल दास नीरज
                
                                                         
                            ‘चाहे चिर गायन सो जाए,
                                                                 
                            
और हृदय मुर्दा हो जाए,
किन्तु मुझे जब गाना ही है-
बैठ चिता की छाती पर भी,

मादक गीत सुना लूँगा मैं।
हार न अपनी मानूँगा मैं!’


बेशक नीरज जी ने वक्त से कभी हार नहीं मानी। अंतिम समय तक सक्रिय रहे। लेकिन आखिरकार उम्मीदों और रुमानियत से भरे इस महान गीतकार, कवि, शायर और एक बेहतरीन संजीदे इंसान ने ज़िंदगी से हार मान ही ली। आगे पढ़ें

स्वप्न झरे फूल से, मीत चुभे शूल से

8 वर्ष पहले

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