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"पूर्वोत्तर की उपेक्षा ने कविता लिखने के लिए प्रेरित किया"

north eastern neglect inspired to write poetry
                
                                                         
                            

मैं कोकराझार (असम) के टेंगापाड़ा में पैदा हुई और मैं कोकराझार गवर्नमेंट कॉलेज में भौतिकी पढ़ाती हूं। भौतिकी और साहित्य के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है। लेकिन बचपन से ही विज्ञान के साथ-साथ कविताओं में मेरी रुचि थी। हालांकि मैं यह नहीं जानती थी कि एक कवयित्री के तौर पर मुझे इतनी सफलता मिलेगी। पूर्वोत्तर के दूसरे साहित्यकारों की तरह मेरी कविताओं में भी हमारी पहचान के प्रति उपेक्षा और भूगोल के साथ अन्याय के खिलाफ क्षोभ है। इस कारण इस पूरे क्षेत्र में व्यापक हिंसा फैली, जिसने हमारी मनमोहक प्रकृति को नजरों से ओझल कर दिया। बोडो जनजाति पूर्वोत्तर का सबसे बड़ा जनजातीय समूह है, जिसकी आबादी बीस लाख से अधिक है।

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लेकिन हमारे समाज से...

8 वर्ष पहले

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