आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

धूमिल को लोहे का ‘स्वाद’ मालूम था, पाश ने लोहा ‘खाया’ था - नामवर सिंह

पाश
                
                                                         
                            

स्पेन के लोककवि लोर्का की हत्या के बारे में कहा जाता है कि जब उसकी अमर कविता ‘एक बुलफाइटर की मौत पर शोकगीत’ का टेप जनरल फ़्रैंको को सुनाया गया तो जनरल ने आदेश दिया कि यह आवाज़ बंद होनी चाहिए। यह घटना लगभग 50 साल पहले की है। कविता पर- फिर वह शोकगीत ही क्यों न हो, फ़ासिस्ट प्रतिक्रिया।
पाश के रूप मे पंजाब को भी एक लोर्का मिला था।

यह कहना है प्रसिद्ध आलोचक और साहित्यकार नामवर सिंह का, राजकमल प्रकाशन द्वारा प्रकाशित किताब ‘बीच का रास्ता नहीं होता’ की भूमिका में वह लिखते हैं कि “पाश उन थोड़े कवियों में से एक हैं जिन्हें लोहे का गहरा एहसास है जैसा कि ‘लोहा’ शीर्षक कविता कहती है-

आगे पढ़ें

सरापा कवि

7 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर