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'नाना ने कहा, अरे कम्बख्त मैट्रिक पास कर ले तो किसी डाकखाने में मोहर लगाने की नौकरी मिल जाएगी'

जावेद अख़्तर
                
                                                         
                            प्रसिद्ध गीतकार जावेद अख्तर ने 'तरकश' में अपने जीवन के अहम पहलुओं को शामिल किया है। बचपन, जवानी, संघर्ष, गीतों की पैदाइश और शेरो शायरी का अपना तर्जुबा जावेद अख्तर ने इस किताब में बड़ी शिद्दत से संजोया है। वह किताब की शुरुआत में ही लिखते हैं कि लोग जब अपने बारे में लिखते हैं तो सबसे पहले यह बताते हैं कि वो किस शहर के रहने वाले हैं पर मैं किस शहर को अपना शहर कहूं ? पैदा होने का जुर्म ग्वालियर में किया लेकिन होश संभाला लखनऊ में, पहली बार होश खोया अलीगढ में, फिर भोपाल में रहकर कुछ होशियार हुआ लेकिन बम्बई आकर काफी दिनों तक होश ठिकाने रहे, तो आईए ऐसा करते हैं कि मैं अपनी जिन्दगी का छोटा सा फ्लैश बैक बना लेता हूं। इसी फ्लैश बैक से एक प्रसंग हम अपने मुड़ मुड़ के देखता हूं सेक्‍शन में प्रकाशित कर रहे हैं। 
                                                                
                
                
                 
                                    
                     
                                             
                                                
                                             
                                                
                                             
                                                
                                                                
                                        
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'बाप बम्बई में है, मां कब्र में'

8 वर्ष पहले

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