हरिशंकर परसाई ने अपने व्यंग्यों के द्वारा मौजूदा व्यवस्था, समाज और सत्ता सभी पर निशाना साधा। यद्यपि उनके व्यंग्य में भी समाज के लिए सकारात्मकता की अलख दिखाई पड़ती है। उनके लिखे कुछ चुनिंदा वक्तव्य यहां पढ़ें।
चंदा माँगनेवाले और देनेवाले एक-दूसरे के शरीर की गंध बखूबी पहचानते हैं। लेनेवाला गंध से जान लेता है कि यह देगा या नहीं। देनेवाला भी माँगनेवाले के शरीर की गंध से समझ लेता है कि यह बिना लिए टल जाएगा या नहीं।
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