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जब सामने पड़ गए डाकू... गीतों के राजकुमार गोपालदास नीरज से जुड़ा एक मज़ेदार क़िस्सा

Gopaldas Neeraj
                
                                                         
                            कविता की ताक़त अकूत है। इस ताक़त को दर्शाने वाले अनेक क़िस्सों से काव्य प्रेमी वाक़िफ़ हैं लेकिन गीतों के राजकुमार गोपालदास नीरज से जुड़ा एक मज़ेदार क़िस्सा है।
                                                                 
                            

नीरज अपने कवि मित्रों के साथ मुरैना में एक कवि सम्मलेन में काव्य पाठ कर स्टेशन की ओर आ रहे थे। इन मित्रों में आगरा यूनिवर्सिटी में समाज शास्त्र के  प्रोफ़ेसर रहे स्वर्गीय डॉ. राजेश्वर प्रसाद सक्सेना भी थे।

रेलवे स्टेशन आता इससे पहले कुछ हथियारबंद लोगों ने कवियों का रास्ता रोका और अपने साथ चलने का आदेश दिया। निहत्थे कवि बंदूकधारियों के पीछे हो लिए। 

भिंड मुरैना डकैतों का इलाक़ा माना जाता है। कवि समझ गए कि उनका अपहरण हुआ है। बीहड़ों में चलते-चलते उन्हें ऐसी जगह पर ले जाया गया जहां कई डकैत पहले से मौजूद थे। उनमें से डकैतों के सरदार ने नीरज की ओर मुख़ातिब हो पूछा, ''क्या करते हो ?'' 

नीरज बोले, "कविता पढ़ते हैं। कवि सम्मेलन में।'' 

सरदार बोला, ''भजन सुनाओ।''
 
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5 वर्ष पहले

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