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दुष्यंत कुमार: हुक्मरानों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाते हैं...दिलों को भी छूते हैं...

Dushyant Kumar ghazal urdu hindi
                
                                                         
                            
दुष्यंत कुमार का जन्म 1 सितंबर 1933 को बिजनौर में हुआ था। निधन भोपाल में 30 दिसंबर 1975 को हुआ था।

दुष्यंत कुमार वह दीप्तमान सूरज हैं जिनसे साहित्य दशकों से प्रकाशित है और सदियों तक प्रकाशमान रहेगा। दुष्यंत का लेखन हुक्मरानों के ख़िलाफ़ आम मानव की आवाज़ उठाता है और दिलों को छूता है। वह हिन्दी- ग़ज़लों के सम्राट कहे जाते हैं। अपनी इसी लेखन-विधा और इसमें उर्दू-हिन्दी के प्रयोग पर उन्होंने किताब 'साये में धूप' में अपनी बात कही है कि-

ग़ज़लों को भूमिका की ज़रूरत नहीं होनी चाहिए, लेकिन एक कैफ़ियत इनकी भाषा के बारे में ज़रूरी है। कुछ उर्दू-दाँ दोस्तों ने कुछ उर्दू शब्दों के प्रयोग पर एतराज़ किया है। उनका कहना है कि शब्द 'शहर' नहीं 'शह्र' होता है, 'वजन' नहीं 'वज्न' होता है।
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कि मैं उर्दू नहीं जानता...

7 वर्ष पहले

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