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क्योंकि अटल जी हमेशा 'अटल' रहे…

क्योंकि अटल जी हमेशा 'अटल' हैं…
                
                                                         
                            वह सत्तर के दशक का शुरुआती दौर था…चुनावी राजनीति की बहुत समझ नहीं थी, लेकिन दो चुनाव चिन्ह की पहचान ज़रूर थी–जलता हुआ दीपक और गाय-बछड़ा, एक भारतीय जनसंघ का और दूसरा कांग्रेस का। और दो ही ऐसे नाम थे जिनके बारे में बार बार सुनते थे, अखबारों में देखते और पढ़ते थे…इंदिरा जी और अटल जी। लोहिया जी और नम्बूदरीपाद जैसे नाम भी कभी कभार सुनाई पड़ते थे। 1971 में पाकिस्तान से हुई जंग और अलग बांग्लादेश बनने के दौरान इंदिरा जी को पहली बार पटना के गांधी घाट से मोटर बोट पर गुज़रते और हाथ हिलाते देखा था। 
                                                                
                
                
                 
                                    
                     
                                             
                                                
                                             
                                                
                                             
                                                
                                             
                                                
                                             
                                                
                                                                
                                        
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वक्त गुज़रा तो अटल जी के बारे में थोड़ा बहुत जाना...

8 वर्ष पहले

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