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सारंगा तेरी याद में नैन हुए बेचैन...विरह का अनुपम भाव

सारंगा
                
                                                         
                            जीवन में विरह से हर कोई डरता है। अकेला रहना जीवन की सबसे बड़ी सजा कही जाती है। सब साथ चाहते हैं। यह सही भी है। साथ सुनहरा हो तो जीवन मंगल हो जाता है। भारत एक सामाजिक देश है। जहां समाज में मनुष्य उत्तरदायित्वों के साथ अपनी-अपनी भूमिका अदा कर रहा है। समाज में माता, पिता, भाई, बहन, पति-पत्नी, के अलावा दोस्ती का रिश्ता भी होता है।
                                                                
                
                
                 
                                    
                     
                                             
                                                

सभी रिश्तों की कहीं न कहीं कोई सामाजिक बुनियाद है लेकिन दोस्ती और प्रेम के रिश्ते में बुनियाद सिर्फ प्रेम और विश्वास ही हैं। प्रेम दो भावनाओं की आत्म स्वीकरोक्ति है। यह किसी के भी साथ हो सकता है। यह जब होता है तो आदमी बस इसके भाव लहरियों में अपने आप बहने लगता है। इस बेचैनी से हर कोई बचने की कोशिश करता है। लेकिन जिसे यह मिलनी होती है, उसे मिल ही जाती है। बेचैनी दिल को प्रक्षालित करने लगती है। आदमी भाव से दूसरी दुनिया का हो जाता है। यूं कहें कि प्रेम में बेसुध आदमी लूटने के बजाए लुटने में लगा रहता है।
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8 वर्ष पहले

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