गोपालदास नीरज के नाम से कौन नावाक़िफ़ होगा। एक ऐसे कवि जिनकी कविताओं ने तो लोगों को छुआ ही, उनके लिखे गीत भी लोगों ने ख़ूब गुनगुनाए। गीतऋषि नीरज जब मंच पर आते थे तो श्रोता मंत्रमुग्ध हो जाते थे। उनके लिखे नग़्मे क्लासिक गीतों की श्रेणी में आते हैं जिन्हें लोग आज भी अपनी प्लेलिस्ट में शामिल करते हैं।
लिखे जो ख़त तुझे, वो तेरी याद में
हज़ारों रंग के, नज़ारे बन गए
सवेरा जब हुआ, तो फूल बन गए
जो रात आई तो, सितारे बन गए
कोई नगमा कहीं गूँजा, कहा दिल ने ये तू आई
कहीं चटकी कली कोई, मैं ये समझा तू शरमाई
कोई खुश्बू कहीं बिख़री, लगा ये ज़ुल्फ़ लहराई
फ़िज़ा रंगीं अदा रंगीं, ये इठलाना, ये शरमाना
ये अंगड़ाई, ये तन्हाई, ये तरसा कर चले जाना
बना देगा नहीं किसको, जवां जादू ये दीवाना
खिलते हैं गुल यहाँ, खिल के बिखरने को
मिलते हैं दिल यहाँ, मिल के बिछड़ने को
कल रहे ना रहे, मौसम ये प्यार का
कल रुके न रुके, डोला बहार का
चार पल मिले जो आज, प्यार में गुज़ार दे
झीलों के होंठों पर, मेघों का राग है
फूलों के सीने में, ठंडी-ठंडी आग है
दिल के आइने में तू, ये समां उतार दे
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खिलते हैं गुल यहाँ, खिल के बिखरने को
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