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महंगाई डायन ...एक बढ़ता हुआ दर्द जो गीत बन गया 

महंगाई
                
                                                         
                            सखी सईंया तो खूब ही कमात है
                                                                 
                            
महंगाई डायन खाये जात है


फिल्म ‘पीपली लाइव’ का यह गीत काफी लोकप्रिय हुआ था। इस गीत के माध्यम से एक प्रमुख सामाजिक-आर्थिक समस्या 'महंगाई' की ओर ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया गया है।

अगर हम यह कहें कि देश में महंगाई और रोजगार जैसे मुद्दों पर जनता में लामबंदी बहुत कम देखी जाती है,  लोग सड़कों पर नहीं उतरते तो मान लीजिए कि यह सरकारों का सौभाग्य है। असल में यही देश का दुर्भाग्य भी है। 

सरकारें एक-दूसरे को कोसती रह जाती हैं। कोई कहता है पुराने दिन ही भले थे, कोई अच्छे दिन की ढांढस बंधाता रह जाता है। लेकिन समस्या जत की तस मुंह बाय़े खड़ी है।  आगे पढ़ें

8 वर्ष पहले

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