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अजी रूठकर अब कहां जाइएगा...विश्वास है तो खोना-बिछड़ना कैसा...

आरजू
                
                                                         
                            शब्दों के समंदर में तैरते हुए मानवीय संवेदनाओं को संजोये हुए गीतों की लड़ी में से आज एक बहुत ही भावुक गीत पर चर्चा की जाएगी। फ़िल्मों में कितने ही पॉपुलर फ़ॉर्मूले अपनाए गए हैं। ये सभी फ़ॉर्मूले अपने आपमें एक नया इफेक्ट होते हैं। नायक-नायिका कोमल भावों से अपने प्रेम ज़ाहिर करते हैं। हमारे गीतकार उन मनोभाव को बखूबी गीत या ग़ज़ल बनाकर हमारे सामने प्रस्तुत करते हैं।
                                                                 
                            

अजी रूठकर अब कहाँ जाईयेगा
जहाँ जाईयेगा, हमें पाईयेगा

निगाहों से छुपकर दिखाओ तो जाने
ख़यालों में भी तुम ना आओ तो जाने
अजी लाख परदों में छुप जाईयेगा
नज़र आईयेगा, नज़र आईयेगा आगे पढ़ें

नज़र की जुबां से समझ जाईयेगा

7 वर्ष पहले

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