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नारी...तुम कभी ममता हो

                
                                                         
                            नारी.....
                                                                 
                            
तुम कभी ममता हो
कभी शक्ति हो
कभी प्रेरणा हो
जीवन के सुख दुख में
बराबर की हिस्सेदार हो।

शब्द कम पड़ जाए
शायद तेरे लिए..
लेकिन...
तुम परेशान भी हो
और बेबस भी
इस समाज के रवैये से।

सम्मान तो पाती हो तुम
लेकिन...
सिर्फ अखबारों के पन्ने पर
और कार्यक्रम के भाषण में!
बाकी दिन कटते हैं कैसे?
ये तो तुम ही जानती हो..
नारी तुम कभी शक्ति हो
और कभी ममता हो।
- जफर अहमद
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 वर्ष पहले

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