आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

और मैं सो गया

                
                                                         
                            सर्द हवाए, काली रातें
                                                                 
                            
मस्त नजारे, पुरानी बातें
कुछ दिलचस्प किस्से छेड़ कर
मैं खुद सो गया

शोक सम्पन्न, बेबात खेरातें
तंग माहौल, सुहानि यादें
यादों को मेज किनारे रख कर
मैं खुद सो गया

मौसम बेहके, मैं भी बेहकुं
आंखें देखुं, दुनिया देखुं
पर कुछ टिम-टिमाते तारे देख
मैं खुद सो गया

मन में आई कुछ बात मेरे
लिखना चाहूं कुछ साथ तेरे
आधी रात को तुझे जगा कर
मैं खुद सो गया

हुआ केसा सा ही मन मेरा
खालीपन से थका हारा तन मेरा
जग रहा था सारी रात फिर नींद आई
और मैं सो गया
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर