सर्द हवाए, काली रातें
मस्त नजारे, पुरानी बातें
कुछ दिलचस्प किस्से छेड़ कर
मैं खुद सो गया
शोक सम्पन्न, बेबात खेरातें
तंग माहौल, सुहानि यादें
यादों को मेज किनारे रख कर
मैं खुद सो गया
मौसम बेहके, मैं भी बेहकुं
आंखें देखुं, दुनिया देखुं
पर कुछ टिम-टिमाते तारे देख
मैं खुद सो गया
मन में आई कुछ बात मेरे
लिखना चाहूं कुछ साथ तेरे
आधी रात को तुझे जगा कर
मैं खुद सो गया
हुआ केसा सा ही मन मेरा
खालीपन से थका हारा तन मेरा
जग रहा था सारी रात फिर नींद आई
और मैं सो गया
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