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हसरत-ए-दिदार

                
                                                         
                            पहले अच्छे से देख तो लो हुस्न-ए-बहार को
                                                                 
                            
फिर चाहे करते रहना बयां हसरत-ए-दिदार को

एक ज़माना लग गया आम को नज़मो जब्त बताने में
चेहरा उसने दिखा के तितर बितर कर दी कतार को

माशूक देख उसकी हाय आँखो का पैमाना
घर मैं छोड़ आया अपने सारे खुमार को

जश्न-ए-दावत में बुलाया हमें अर्ज़े-ए-इल्तिजा करके
और फकीर को इजाजत ना देना कहते हैं पेहरेदार को

आम फहम, बे-इनाद, नेक, सलील-सादा मैं
ऐसी क्या चूक हुई कि आप निकाल लिए तलवार को

ज़रा देखिये इस नाफ़रमान की जुर्रत
अपाहीज हो कर भी जो घूर रहा है पहाड़ को

हाल पुछने घर पे भीड़ लगी खैरख्वाहियों की
फिर जब माहोल बना तो भूल गऐ सब बीमार को

फिर जब आओ मिलने तो जरा तहज़ीब से आना
यहाँ पर घोड़े भी गिरा देते हैं बेअदब सवार को

शब्दकोष-
हुस्न-ए-बहार- Beauty of spring
हसरत-ए-दिदार- Longing
नज़मो जब्त- Discipline
अर्ज़े-ए-इल्तिजा- Request
आम फहम- Ease to understand
बे-इनाद- who has no enemy
सलील-सादा- Simple as water
नाफ़रमान- Disobediently
खैरख्वाहियों- Well wisher
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3 वर्ष पहले

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