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लक्ष्य - पथ....

                
                                                         
                            गिरते - गिरते ही एक दिन,
                                                                 
                            
सम्भल जायेगा,
तेरा भ्रमित -सा जीवन,
सँवर जायेगा।
नभ मे घने -घन हो,
जब छाए हुए,
राह कोई नजर न,
आये तुझे,
अपने अंतर्मन की राह पर,
तू चलना,
चलते रहने से जीवन,
सँवर जायेगा ।
घने-घन से निकलकर,
तू निखर जायेगा,

गिरते - गिरते ही एक दिन,
संभल जायेगा
---युवराज सिंह "ब्रजेश"
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3 वर्ष पहले

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