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ये मयखाने

                
                                                         
                            ये जाम, ये मयखाने अब अच्छे नहीं लगते।
                                                                 
                            
उसको दोस्त पुराने अब अच्छे नहीं लगते।।

मजबूर होकर सहरा में आना पड़ा हमको।
ये घर और ठिकाने अब अच्छे नहीं लगते।।

यूं ही , ख़ामोशी इख़्तियार नहीं की हमने।
उसको,मेरे फ़साने अब अच्छे नहीं लगते।।

तमाम उम्र , उस पर यकीं किया है हमने।
मगर उसके बहाने अब अच्छे नहीं लगते।।

वो मुद्दतों से, अहसान जताता आ रहा है।
पर मुझ यही ताने अब अच्छे नहीं लगते।।
-यूनुस खान
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2 hours ago

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