वक्त का क्या, रफ्ता-रफ्ता गुज़र रहा है।
वो मुद्दतों पुराना नशा, अब उतर रहा है।।
दरीचे के उस पार जो चिराग जलता था।
वो चिराग भी अब तूफ़ानों से डर रहा है।।
यूनुस खान
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