जो बुझ ना सकी , वो प्यास मिली मुझे।
बज़्म-ए-तरब भी तो उदास मिली मुझे।।
जिस आस पे आस लगायें थे मुद्दतों से।
वो आस भी,यूं अधूरी आस मिली मुझे।।
यहां वहां हर सिम्त तलाश किया जिसे।
वो तस्वीर, तसव्वुर के पास मिली मुझे।।
हमने सोचा था फांसले मिट गये हैं सब।
तेरे मेरे दरम्यां वो ही खटास मिली मुझे।।
-यूनुस खान
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