शौक़ से, अश्कों को पानी कहिए।
ग़म को हिज़्र की निशानी कहिए।।
वो झोंके जो यूं दर्द बढ़ाते हैं मेरा।
उन्हें, अब हवा की रवानी कहिए।।
मैंने हर बात साफ़गोई से कही है।
इसको चाहे मेरी लंतरानी कहिए।।
-यूनुस खान
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