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हक़ीक़त को भी, फ़साना समझा उसने।

                
                                                         
                            हक़ीक़त को भी, फ़साना समझा उसने।
                                                                 
                            
हर सबब को,एक बहाना समझा उसने।।

ये घर भी, मेरे लिए क़फ़स से कम नहीं।
इसी क़फ़स को, ठिकाना समझा उसने।।
-यूनुस खान
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एक घंटा पहले

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