तपते लबों के सामने, जाम रक्खा है।
अपने सब्र को हमने , थाम रक्खा है।।
एक हम हैं, तेरी राह देखते हैं, वरना।
किसके पास वक्त-ए-शाम रक्खा है।।
-यूनुस खान
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