जिंदगी में जो ख़्वाब थे,वो ख़्वाब रह गये।
जो उलझे थे मुद्दतों से,वो हिसाब रह गये।।
कुछ राज़, राज़ ही रहे,ज़ाहिर ना हो सके।
वो चेहरे जिनपे नकाब थे,नकाब रह गये।।
मुकद्दर में खिजां थी, क्या गरज बहार से।
जो चुनने थे फूल,उनके इंतखाब रह गये।।
-यूनुस खान
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