अपने हाथ में हिज़्र का परचम लिये हुए।
आंखों में अश्क-ए-शब-ए-ग़म लिये हुए।।
महज़, एक तेरी खुशी की खातिर आज।
हम मुस्कुरा रहे हैं दीदा-ए-नम लिये हुए।।
-यूनुस खान
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