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वफ़ा की आस रक्खूं कैसे किसी से।

                
                                                         
                            बता कोई कैसे सहेगा , तन्हाई इतनी।
                                                                 
                            
क्यूं ख़ामोश है यूं,मेरी परछाई इतनी।।

मुद्दत हुई उनको यूं बिछड़े हुए हमसे।
क्यूं तसव्वुर में बसी है जुदाई इतनी।।

क़ैद-बाम-ओ-दर होकर , क्या मिला।
हर सिम्त हो गयी है , रूस्वाई इतनी।।

वफ़ा की आस रक्खूं कैसे किसी से।
मैंने जिंदगी में देखी बेवफाई इतनी।।
-यूनुस खान
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एक घंटा पहले

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