जब से तेरी आमद का पैग़ाम मिला है।
दिल की बेकरारी को आराम मिला है।।
कोई दर, कोई ठिकाना है नहीं अपना।
दीवानों को कब दर-ओ-बाम मिला है।।
-यूनुस खान
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