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हिज़्र का इज़हार

                
                                                         
                            हिज़्र का इज़हार किया नहीं हमने।
                                                                 
                            
सब्र को शर्मसार किया नहीं हमने।।

जो ग़म था , सीने में छुपाये रक्खा।
अश्कों को बेदार किया नहीं हमने।।

बेशक, तूने तग़ाफ़ुल से देखा मुझे।
तुम्हें , दरकिनार किया नहीं हमने।।

तन्हा हूं , खुद से करता हूं गुफ्तगू।
गैरों का एतबार किया नहीं हमने।।

हर मलाल की, पर्दे दारी निभायी।
यूं, हदों को पार किया नहीं हमने।।
-यूनुस खान
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36 मिनट पहले

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