गर सुरूर नहीं मुमकिन, तो खुमार ही सही।
ऐ साकी आज हमको तेरी दुत्कार ही सही।।
तेरी मर्ज़ी से वाबस्ता हैं , ये फैंसले दिल के।
तूने कुछ तो हमें समझा,लाएतबार ही सही।।
-यूनुस खान
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