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हर रास्ता हर तदबीर मैं खंगाल रहा हूं। गिरते-गिरते खुद को यूं संभाल रहा हूं।।

                
                                                         
                            हर रास्ता हर तदबीर मैं खंगाल रहा हूं।
                                                                 
                            
गिरते-गिरते खुद को यूं संभाल रहा हूं।।

अपनी , ये उसूल-परस्ती को छोड़कर।
खुद को , हस्ब-ए-हालात ढाल रहा हूं।।
-यूनुस खान
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6 minutes ago

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