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अपनी दास्तां , उसको सुनायें कैसे।

                
                                                         
                            मेरी हर बात वो बेमानी समझता है।
                                                                 
                            
बहते अश्कों को, पानी समझता है।।

क्या, मेरे ज़ख्मों से वाकिफ नहीं है।
नये दर्द को पीर पुरानी समझता है।।

अपनी दास्तां , उसको सुनायें कैसे।
हकीकत को , कहानी समझता है।।
-यूनुस खान
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एक घंटा पहले

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